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हमारे पूरे शरीर के वजन का 60 फीसदी हिसà¥à¤¸à¤¾ मांसपेशियां होती हैं। ये हमारे हर मूवमेंट के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° हैं। बरà¥à¤¤à¤¨ पकड़ने से लेकर पानी से à¤à¤°à¥€ बालà¥à¤Ÿà¥€ उठाने तक में, à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤° पंकज तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी की तरह गरà¥à¤¦à¤¨ हिलाने से लेकर टाइगर शà¥à¤°à¥‰à¤« की तरह जंप मारने में à¤à¥€ मजबूत मांसपेशियों की ही अहम à¤à¥‚मिका होती है। अगर 57 साल के मिलिंद सोमण और 83 साल की उनकी मां लटक-लटक कर à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ कर पाते हैं तो इसके पीछे à¤à¥€ उनकी मजबूत मांसपेशियां ही हैं। कà¥à¤² मिलाकर देखें तो हमारा उठना, बैठना, चलना, दौड़ना, कोई सामान उठाना, बाइक या गाड़ी चलाना, सब कà¥à¤› मांसपेशियों की वजह से ही संà¤à¤µ होता है। कà¥à¤¦à¤°à¤¤à¥€ तौर पर उमà¥à¤° बढ़ने के साथ मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं। इसे रोकना तो नामà¥à¤®à¤•िन है लेकिन इसकी गति को धीमा जरूर किया जा सकता है। शारीरिक रूप से à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ और फिट लोगों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अमूमन à¤à¤¸à¤¾ देखा जाता है कि साधारण लोगों में 30 साल के बाद मांसपेशियां कमजोर होनी शà¥à¤°à¥‚ हो जाती हैं।
मांसपेशियों को मजबूत कैसे करें, बढ़ती उमà¥à¤° के साथ इसे फिट कैसे बनाकर रखें, कà¥à¤¯à¤¾ वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना है, कà¥à¤¯à¤¾ खाना है?
1. अगर कोई शखà¥à¤¸ पालथी लगाकर फरà¥à¤¶ पर बैठा हो और बिना किसी सहारे के उठजाà¤, इसी तरह अगर कोई शखà¥à¤¸ कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर लगातार 45 मिनट से 1 घंटे के लिठबैठा हो, इसके बाद उसे कमर दरà¥à¤¦ à¤à¥€ न हो तो यह मान सकते हैं कि उसके पैरों और पीठकी मांसपेशियां ठीक-ठाक काम कर रही हैं।
2. गà¥à¤°à¤¿à¤ª यानी पकड़ की टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग नीबू निचोड़कर की जा सकती है। अगर अपनी उंगलियों की मदद से कटे हà¥à¤ आधे नीबू को कोई शखà¥à¤¸ अगर पूरी तरह निचोड़ पाता है तो मान लेना चाहिठकि उसकी गà¥à¤°à¤¿à¤ª ठीक है। हकीकत यह है कि बढ़ती उमà¥à¤° के साथ अमूमन 30 साल के बाद कà¥à¤¦à¤°à¤¤à¥€ तौर पर हम अपनी मांसपेशियों को हर 10 साल पर 3 से 5 फीसदी खो देते हैं।
3. 70 साल की उमà¥à¤° के बाद मांसपेशियों के कमजोर होने की दर कà¥à¤¦à¤°à¤¤à¥€ तौर पर दोगà¥à¤¨à¥€ हो जाती है। यह दर सही फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ से धीमी की जा सकती है, लेकिन इसकी आदत यà¥à¤µà¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से ही डालनी होगी।
4. शरीर में छोटी-बड़ी सैकड़ों मांसपेशियां मौजूद होती हैं। मांसपेशियों को मजबूत करने का तरीका है रोज 15 से 20 मिनट की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और 40 मिनट का बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक। यह शरीर के लिठà¤à¤¸à¤¾ इनà¥à¤µà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट है जिससे वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ दोनों में फायदा होता है।
5. मसलà¥à¤¸ की मजबूती के लिठसिरà¥à¤« वॉकिंग से काम नहीं चलता। à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ बहà¥à¤¤ जरूरी है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ में वजन उठाकर करने वाली à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ जरूर शामिल होनी चाहिà¤à¥¤ यह मांसपेशियों की मजबूती के लिठबहà¥à¤¤ जरूरी है।
6. वजन उठाने वाली à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ जैसे- डंबल, पà¥à¤¶à¤…पà¥à¤¸ आदि जरूर करें। ये à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ हर उमà¥à¤° के लिठजरूरी हैं। à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि 60 या 70 साल के बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— इस तरह के à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ नहीं कर सकते। डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह से करें।
7. महिला हो या पà¥à¤°à¥à¤·, जब शरीर में टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ की कमी होती है तो मांसपेशियों की मजबूती की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ धीमी हो जाती है। महिलाओं में à¤à¥€ कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ मौजूद होता है।
8. मजबूत मांसपेशियों के लिठडायट में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन-डी, विटामिन बी-3, बी-12, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® यà¥à¤•à¥à¤¤ खाना शामिल करें। विटामिन बी को हर दिन लें। वहीं कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® को हर दिन न à¤à¥€ ले पाà¤à¤‚ तो हफà¥à¤¤à¥‡ में कम से कम 4 से 5 दिन जरूर लें।
9. हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सहारा मांसपेशियां होती हैं। अगर शरीर की मांसपेशियां कमजोर होंगी तो हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से कमजोर होने लगती हैं। वहीं हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ मांसपेशियों को मदद करती हैं।
10. बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में कमजोर मांसपेशियां आम हैं। इसलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आदर दें और उनका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें लेकिन घर में वे जो à¤à¥€ काम कर सकते हैं, जरूर करने दें।
मांसपेशियां कमजोर हैं, à¤à¤¸à¥‡ पहचानें
- पैरों में ताकत महसूस न होना
- चलते-फिरते बार-बार गिर जाना
- खेलते-दौड़ते हà¥à¤ गिर जाना
- पालथी मारकर बैठने के बाद उठते समय हमेशा सहारे की जरूरत पड़ना
- किसी चीज को पकड़ते वकà¥à¤¤ सही तरीके से गà¥à¤°à¤¿à¤ª महसूस न होना
- बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ थकावट महसूस होना
- अपने बराबर वजन, लंबाई और उमà¥à¤° के शखà¥à¤¸ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कम वजन उठाना, कम चल पाना
- छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गोद में उठाने में à¤à¥€ परेशानी महसूस होना
- à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करने में परेशानी होना
- साइकल चलाने में समसà¥à¤¯à¤¾ होना
कमजोर होने की ये हैं वजहें
टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ में कमी होना
यह कमी अमूमन उमà¥à¤° की वजह से होती है। चाहे पà¥à¤°à¥à¤· हो या महिला, टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ की कमी मांसपेशी की कमजोरी की वजह बन जाती है। 50 साल की उमà¥à¤° के बाद अमूमन इसके उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में कमी होने लगती है। यह कमी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। महिलाओं में à¤à¥€ कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ मौजूद होता है। मेनपॉज (आखिरी माहवारी) के बाद इसमें तेजी से कमी आती है। चूंकि टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ शरीर में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के उपयोग में सहायक होता है। à¤à¤¸à¥‡ में मांसपेशियों का जो सबसे अहम ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ है, उसमें कमी आने लगती है। इसलिठà¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक जरूर करें।
मेनपॉज के बाद हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ डिसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¬ होना
गांव की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° महिलाà¤à¤‚ जो हमेशा से वजन उठाने का काम करती हैं, उनमें आमतौर पर मांसपेशियों की कमजोरी की गति बहà¥à¤¤ धीमी रहती है। इतना ही नहीं, मेनपॉज (आखिरी माहवारी) के बाद जब टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ और दूसरे हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ डिसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¬ हो जाते हैं तो à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फरà¥à¤• नहीं पड़ता। इसके अलावा वे सà¤à¥€ शहरी महिलाà¤à¤‚ जो सही तरीके से शारीरिक रूप से à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहती हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ परेशानी कम होती है। इसलिठसà¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन ओर सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤¿à¤¨à¤¾ बढ़ाने वाली à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करें।
वजन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाना
अगर कोई शखà¥à¤¸ ओवरवेट हो तो उसके लिठà¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। उसके लिठलगातार 40 मिनट तक बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक à¤à¥€ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ होती है। दूसरी बात यह कि उसकी मांसपेशियां देखने से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लगती हैं, लेकिन उनमें फैट à¤à¥€ होता है यानी पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ कम हो जाती है जो शरीर की बिलà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग बà¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸ कहलाती है। जिस मांसपेशी में फैट का जमाव जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाता है, वहां की मांसपेशी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ढीली हो जाती है। कम à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और फैट जमा होने की वजह से ओवरवेट या मोटे शखà¥à¤¸ की मांसपेशियां à¤à¥€ बढ़ती उमà¥à¤° के साथ कमजोर होती जाती हैं।
सही पोषण न लेना
अगर कोई शखà¥à¤¸ अपनी हर दिन की डाइट में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिनà¥à¤¸ आदि चीजों की मातà¥à¤°à¤¾ ठीक से न ले रहा हो तो उसे à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ जलà¥à¤¦à¥€ आ जाती है।
कà¥à¤¯à¤¾ है उपाय: इससे बचने के लिठ1 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® वजन के हिसाब से 1 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ (60 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® के शखà¥à¤¸ को 60 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨) हर दिन खाना चाहिà¤à¥¤ वहीं फाइबर (मौसमी सबà¥à¤œà¥€, फल, सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤Ÿà¤¸ आदि) à¤à¥€ खाने चाहिà¤à¥¤ यह à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तेल-मसाले वाली चीजों से बचें। जंक फूड आदि से परहेज रखें।
बीमारी से पीड़ित होना
अगर कोई शखà¥à¤¸ शà¥à¤—र और थायरॉइड जैसी परेशानी से पीड़ित हो तो उसकी मांसपेशियां जलà¥à¤¦à¥€ कमजोर हो जाती हैं। बढ़ी हà¥à¤ शà¥à¤—र की वजह से शरीर पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और दूसरे मिनरलà¥à¤¸ को सही तरीके से जजà¥à¤¬ नहीं कर पाता। कमजोर मांसपेशियों की वजह से शरीर में सारा गà¥à¤²à¥‚कोज लिवर में चला जाता है। फिर लिवर में यह फैट के रूप में जमा होने लगता है। नतीजा फैटी लिवर की परेशानी। यह लिवर की बीमारी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ होती है। वहीं अगर थायरॉइड की परेशानी है तो हर दिन खाली पेट डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताई हà¥à¤ˆ दवा को जरूर लेना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ की बनती है। यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में जेनेटिक होता है। इसमें जनà¥à¤® से या फिर किसी खास उमà¥à¤° में मांसपेशियों में बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कमजोरी आ जाती है, जिसकी वजह से चलना-फिरना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। किसी को गंà¤à¥€à¤° परेशानी जैसे किडनी, हारà¥à¤Ÿ और सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• की वजह से à¤à¥€ मांसपेशियों पर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ता है। फिजियोथेरपिसà¥à¤Ÿ, सही डाइट, रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ और 7 से 8 घंटे की नींद à¤à¥€ जरूरी है।
चोट से मूवमेंट घट जाना
चोट की वजह से कई बार दिमाग में कà¥à¤²à¥‰à¤Ÿ या फिर इंटरनल बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होती है। इस वजह से à¤à¥€ किसी खास मांसपेशी पर असर पड़ जाता है। कई बार जोड़ों में दरà¥à¤¦, हडà¥à¤¡à¥€ टूटने आदि से चलना-फिरना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है तो मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। 5 से 6 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक मूवमेंट न होने के बाद होता है।
कà¥à¤¯à¤¾ है उपाय: जब à¤à¥€ चोट, सरà¥à¤œà¤°à¥€ आदि की वजह से मूवमेंट कम होता है तो इसका असर सीधा मांसपेशियों पर पड़ता है। इसलिठआजकल हर तरह की सरà¥à¤œà¤°à¥€ में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की यह कोशिश होती है कि मरीज को जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ चला सकें। नी-टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट में तो मरीज को दूसरे दिन ही चलाना शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं।
मांसपेशियों में आई कमजोरीयां होंगी दूर
कमजोर मांसपेशी का असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है। कमजोर मांसपेशियों की वजह से हमारी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, जॉइंट à¤à¥€ कमजोर हो जाते हैं। वहीं कई बार जोड़ों में परेशानी की वजह से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कसरत व बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक न करना और योग से दूरी:
मजबूती के लिठजरूरी à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ
हम जाने-अनजाने दो तरह की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करते हैं। पहली सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन (ताकत लाने यानी à¤à¤¾à¤°à¥€ वजन उठाने के लिà¤) और दूसरी सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤¿à¤¨à¤¾ (कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ाने यानी लगातार काम करने के लिà¤)। दोनों à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करने के तरीके à¤à¥€ अलग हैं और दोनों के मकसद à¤à¥€:
1. सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ
अपनी मांसपेशियों की सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थ बनाठरखने और उसे बढ़ाने के लिठहर दिन कम से कम 15 से 20 मिनट की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ बहà¥à¤¤ जरूरी है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ में वजन उठाने वाली à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ, मसलन: डंबल उठाना, पà¥à¤²à¥ˆà¤‚क, पà¥à¤¶à¤…पà¥à¤¸ लगाना आदि। घरों में à¤à¤• चकà¥à¤•े वाली साइकल जो फिकà¥à¤¸à¥à¤¡ होती है, उससे à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ कर सकते हैं। जिसमें रेसिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट बढ़ाकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दम लगाना पड़ता है। उसे 15 मिनट तक चलाना। सच तो यह है कि ये à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ मसलà¥à¤¸ मास बढ़ाने में मददगार हैं। ये हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मजबूती के लिठअहम हैं। इस तरह की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ की जरूरत à¤à¤• मजबूत मांसपेशी के लिठहोती है। इसलिठइसे सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ कहते हैं। सीधे कहें तो à¤à¤¸à¥€ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ ही यह तय करती हैं कि हमारी वजन उठाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कितनी है। मान लें कि à¤à¤• शखà¥à¤¸ à¤à¤• बार में 30 किलो गà¥à¤°à¤¾à¤® वजन उठा सकता है और इसे 30 सेकंड से 1 मिनट के लिठहोलà¥à¤¡ कर सकता है। हम यह मान सकते हैं कि उस शखà¥à¤¸ की सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थ 30 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® है। अगर कोई ये सब à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ नहीं करता है तो उसकी मांसपेशियां बढ़ती उमà¥à¤° के साथ कमजोर होती जाती हैं। उमà¥à¤° बढ़ने पर पैर, हाथों में दम महसूस होना बहà¥à¤¤ कम हो जाता है।
2. सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤¿à¤¨à¤¾ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ
कहते हैं कि जब तक पैर चलेंगे, सà¤à¥€ अंग सही तरीके से चलेंगे। मांसपेशी को लेकर à¤à¥€ यह बात सही है। पैर चलाने का मतलब पैर हिलाना नहीं है बलà¥à¤•ि हर दिन तेजी से पैर चलाने होंगे।
कà¥à¤¯à¤¾ करें: बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक करें। इसके लिठà¤à¤• मिनट में 90 कदम से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चलें। कम से कम 40 मिनट à¤à¤¸à¤¾ ही करना होगा। कोई चाहे तो 30 मिनट की साइकà¥à¤²à¤¿à¤‚ग, 15 से 20 मिनट की सà¥à¤µà¤¿à¤®à¤¿à¤‚ग आदि को शामिल कर सकता है। इनमें सà¤à¥€ करना जरूरी नहीं, लेकिन à¤à¤• दो फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ को लगातार जारी रखने से हमारी मांसपेशी मजबूत होती जाती है। हमारी कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ती है। हम दिनà¤à¤° जो काम करते रहते हैं वह इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ हर दिन की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ की वजह से। वहीं जब कोई शखà¥à¤¸ वॉकिंग के दौरान कà¥à¤› वजन पैरों में बांध ले तो वह सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤¿à¤¨à¤¾ बढ़ाने के साथ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ हो जाती है।
कब से शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ
इसे किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° में शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं। बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— à¤à¥€ इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ कर सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि वजन उतना ही उठाना है जितना डॉकà¥à¤Ÿà¤° कहे। 30 साल के बाद से ही हर 10 साल पर मांसपेशी की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ 3 से 5 फीसदी तक कम होती जाती है। उनका मास कम होने लगता है।
बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— यानी 60 पार वाले कà¥à¤¯à¤¾ करें
बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में जब बढ़ती उमà¥à¤° की वजह से मांसपेशियां कमजोर होने लगती है तो उसे सारà¥à¤•ोपेनिया कहते हैं। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब जलà¥à¤¦à¥€ आती है जब कोई शखà¥à¤¸ फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ से दूर रहा हो। अगर उसके रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ में यह सब शामिल रहा है तो मांसपेशियां कमजोर होने की रफà¥à¤¤à¤¾à¤° धीमी रहती है। बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— 60 साल के बाद à¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थन और सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤¿à¤¨à¤¾ की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं। हां, इसके लिठजरूरी है कि वह à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ की सलाह जरूर ले। à¤à¤• ही उमà¥à¤° के, à¤à¤• ही वजन के दो अलग-अलग बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के लिठसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थनिंग à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ अलग-अलग हो सकती है। दरअसल, यह उनकी वजन उठाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करेगा। जहां तक घर में खà¥à¤¦ को à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रखने की बात है तो बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों को आदर दें, समà¥à¤®à¤¾à¤¨ दें। साथ ही, उनकी इचà¥à¤›à¤¾ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ à¤à¥€ रहने दें। जब वे à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहेंगे, उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ को फायदा होगा।
वाइबà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ थेरपी: इसमें Whole Body Vibration Machine का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। शखà¥à¤¸ को मिनी सà¥à¤•à¥à¤µà¥‡à¤Ÿ पोजिशन (शरीर को थोड़ा à¤à¥à¤•ाते हà¥à¤ बैठने की पोजिशन में होलà¥à¤¡ करना) में रहना होता है। इससे बैलेंस बनाठरखने में फायदा होता है। साथ ही वाइबà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ थेरपी से काफी फायदा होता है। à¤à¤• बार में जितनी देर होलà¥à¤¡ करके रख सकें, उतनी देर रखें।
गà¥à¤°à¤¿à¤ª को मजबूत करने के लिठà¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ:
1. अपनी कलाई को सीधी रखकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जोर न लगाते हà¥à¤ अंगूठे को हर उंगली के पोर पर ले जाकर छà¥à¤à¤‚। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि à¤à¤• बार में अंगूठे से à¤à¤• ही उंगली को छà¥à¤à¤‚। इस à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ को 4 से 5 बार करें। गà¥à¤°à¤¿à¤ª अचà¥à¤›à¥€ होगी और लिखते हà¥à¤ पेन चलाने में गà¥à¤°à¤¿à¤ª बनेगी।
2. रबड़ की बॉल को हथेलियों के बीच फंसाकर दबाने से कलाई की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसे दिनà¤à¤° में 10 बार करें और à¤à¤• बार में 50 बार करने का लकà¥à¤·à¥à¤¯ रखें।
मालिश कितनी होती है फायदेमंद
जब शरीर थका हो तो मालिश से राहत मिलती है। लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ मालिश से मांसपेशियां मजबूत होती हैं?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कैसा फायदा: गांवों में आज à¤à¥€ नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को 5 से 7 साल की उमà¥à¤° तक हर दिन तेल मालिश करने का चलन है। मालिश सरसों या फिर तिल के तेल से करते हैं। उनका शरीर व दिमाग विकसित हो रहा होता है। à¤à¤¸à¥‡ में खून के तेज बहाव से हर अंग तक पोषक ततà¥à¤µ पहà¥à¤‚चते हैं।
बड़ों को कितना फायदा: अचà¥à¤›à¥€ मालिश नींद की तरफ ले जाती है। यह थकावट कम करती है। इससे मांसपेशियां मजबूत होंगी, यह मà¥à¤®à¤•िन नहीं। हां, कई बार मालिश करने वाले की मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं!
डाइट में ये खाà¤à¤‚
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के लिà¤: 2 कटोरी दाल, 4 से 5 टà¥à¤•ड़े पनीर के (25 गà¥à¤°à¤¾à¤®) या 10 गà¥à¤°à¤¾à¤® सोयाबीन, 1 से 2 अंडे या 2 पीस मछली।
विटामिन C, B-12 और B-3 के लिà¤: सेब, केला, संतरा (इनमें से कोई दो फल। 1 संतरा और 1 सेब हर दिन लें, केला à¤à¤• दिन छोड़कर à¤à¤• दिन लें), सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पालक और चà¥à¤•ंदर à¤à¥€ ले सकते हैं। नॉनवेज में à¤à¤• अंडे, मछली, लिवर आदि à¤à¥€ ले सकते हैं।
विटामिन-D और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के लिà¤: सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¬à¤¹ 9 से 12, गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में 7 से 10 के बीच। 30 से 40 मिनट के लिठधूप में बैठें। जितना मà¥à¤®à¤•िन हो शरीर को उघाड़कर रखें। हर दिन à¤à¤• गिलास दूध अगर पचाने में परेशानी न हो। विटामिन डी की कमी की वजह से शरीर कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जजà¥à¤¬ नहीं कर पाता।
इस टेसà¥à¤Ÿ से पता चलता है मसलà¥à¤¸ मास के बारे में
इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° MRI की मदद लेते हैं। जिस अंग में कमजोरी आती है, उस अंग का à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ कराया जाता है। इससे डॉकà¥à¤Ÿà¤° यह पता कर लेते हैं कि मांसपेशियों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कैसी है और मांसपेशियां कितनी कमजोर हैं।
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